राम रहीम को मिली 40 दिन की परोल. परोल पाना कानून अधिकार.

 राम रहीम को मिली 40 दिन की परोल. परोल पाना कानून अधिकार.

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 40 दिन की पैरोल दी गई है। इस खबर के सामने आते ही देशभर में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे सवालों के घेरे में देखते हैं, तो वहीं कानून की नजर में पैरोल पाना एक वैध और कानूनी अधिकार माना जाता है, बशर्ते सभी नियमों और शर्तों का पालन किया गया हो।

पैरोल का मतलब यह नहीं होता कि किसी दोषी को सजा से मुक्त कर दिया गया है। पैरोल अस्थायी राहत होती है, जिसमें कैदी को कुछ समय के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति दी जाती है। यह अनुमति अच्छे आचरण, स्वास्थ्य कारणों, पारिवारिक परिस्थितियों या सामाजिक कारणों के आधार पर दी जा सकती है। भारतीय कानून के अनुसार, हर कैदी को कुछ शर्तों के साथ पैरोल के लिए आवेदन करने का अधिकार है।

राम रहीम को दी गई 40 दिन की पैरोल भी इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत मिली है। प्रशासन द्वारा यह देखा जाता है कि संबंधित व्यक्ति से कानून-व्यवस्था को कोई खतरा तो नहीं है, और क्या पैरोल की शर्तों का पालन किया जा सकता है या नहीं। इसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाता है। इस दौरान कैदी को तय नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है, जैसे कि किसी विशेष स्थान तक सीमित रहना, पुलिस निगरानी में रहना और किसी भी सार्वजनिक या राजनीतिक गतिविधि से दूर रहना।

कानूनी जानकारों का कहना है कि पैरोल देना या न देना सरकार और जेल प्रशासन का विवेकाधीन अधिकार होता है, लेकिन यह पूरी तरह कानून के दायरे में होता है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट भी समय-समय पर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि पैरोल कोई विशेष रियायत नहीं बल्कि सुधार की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका उद्देश्य कैदी को समाज से जोड़कर रखना और उसके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना होता है।

राम रहीम के मामले में भी यही कहा जा रहा है कि पैरोल नियमों के तहत दी गई है। हालांकि, इस पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं आना स्वाभाविक है, क्योंकि मामला संवेदनशील रहा है। फिर भी, कानून सभी के लिए समान है और नियमों के अनुसार लिए गए फैसलों को उसी नजर से देखा जाना चाहिए।

अंत में यही कहा जा सकता है कि पैरोल कानूनन अधिकार है, न कि कोई विशेष सुविधा। जब तक पैरोल नियमों और शर्तों के अनुसार दी जाती है, तब तक इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। इस पूरे मामले में भी प्रशासन और कानून के दायरे में ही निर्णय लिया गया है।


Ravi Kumar 

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